बढ़े हुए प्रोस्टेट ग्रंथि: कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

बढ़े हुए प्रोस्टेट ग्रंथि: कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

बढ़ा हुआ प्रोस्टेट यानी benign prostatic hyperplasia (BPH) क्या है? जानिए प्रोस्टेट बढ़ने के मुख्य कारण, इसके सामान्य लक्षण, जांच, प्रोस्टेट कैंसर से इसका अंतर और आयुर्वेद में उपयोग होने वाली जड़ी-बूटियों के बारे में।

प्रोस्टेट पुरुष प्रजनन तंत्र की एक छोटी ग्रंथि है, जो urinary system के नीचे स्थित होती है और मूत्रमार्ग के एक हिस्से को घेरती है। उम्र बढ़ने के साथ प्रोस्टेट के ऊतक बढ़ सकते हैं। इसे benign prostatic hyperplasia (BPH) कहा जाता है। यह कैंसर नहीं है, लेकिन प्रोस्टेट बढ़ने पर कुछ पुरुषों को पेशाब से जुड़ी परेशानी हो सकती है।

आयुर्वेद में मूत्र संबंधी स्वास्थ्य के लिए कई जड़ी-बूटियों का पारंपरिक उपयोग मिलता है। हालांकि, किसी जड़ी-बूटी का पारंपरिक उपयोग और BPH में उसका चिकित्सकीय प्रभाव अलग-अलग बातें हैं। इसलिए आयुर्वेदिक उपायों को समझते समय उपलब्ध प्रमाण और चिकित्सकीय सलाह दोनों को ध्यान में रखना जरूरी है।

Disclaimer: यह लेख सामान्य शैक्षिक जानकारी के लिए है। यह किसी बीमारी का diagnosis, prevention या treatment नहीं है। लगातार urinary symptoms, urine में blood, पेशाब रुक जाना या prostate disease की आशंका होने पर डॉक्टर या urologist से सलाह लें।

बढ़ा हुआ प्रोस्टेट क्या होता है?

Quick Answer

बढ़ा हुआ प्रोस्टेट यानी benign prostatic hyperplasia (BPH) एक non-cancerous condition है, जिसमें प्रोस्टेट का आकार बढ़ सकता है। बढ़ा हुआ प्रोस्टेट मूत्रमार्ग पर दबाव डाल सकता है, जिससे पेशाब की धार और मूत्राशय खाली करने में परेशानी हो सकती है।

BPH को समझने के लिए तीन बातें महत्वपूर्ण हैं:

  • BPH कैंसर नहीं है।
  • हर बढ़े हुए प्रोस्टेट में पेशाब संबंधी लक्षण हों, यह जरूरी नहीं है।
  • प्रोस्टेट का आकार और लक्षणों की गंभीरता हमेशा एक जैसे नहीं होते।

उम्र BPH का प्रमुख जोखिम कारक है। NIDDK के अनुसार, 40–64 वर्ष के लगभग 5–6% और 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लगभग 29–33% पुरुषों में BPH पाया जाता है (1)।

बढ़े हुए प्रोस्टेट के मुख्य कारण क्या हैं?

बढ़े हुए प्रोस्टेट के मुख्य कारण क्या हैं

BPH का कोई एक निश्चित कारण पूरी तरह स्थापित नहीं है। उम्र के साथ होने वाले हार्मोन संबंधी बदलाव और प्रोस्टेट के ऊतकों में परिवर्तन इसकी प्रक्रिया में भूमिका निभा सकते हैं।

उम्र बढ़ना

BPH उम्र के साथ अधिक सामान्य होता जाता है। उम्र बढ़ने पर प्रोस्टेट के ऊतकों में होने वाले बदलाव इसके आकार में वृद्धि से जुड़े हो सकते हैं।

हार्मोन में बदलाव

उम्र बढ़ने के साथ पुरुष हार्मोन के स्तर और उनके प्रभाव में बदलाव हो सकते हैं। प्रोस्टेट के ऊतक इन हार्मोन के प्रति संवेदनशील होते हैं, इसलिए ये बदलाव BPH की प्रक्रिया में भूमिका निभा सकते हैं।

पारिवारिक इतिहास

अगर परिवार में BPH या प्रोस्टेट से जुड़ी समस्याओं का इतिहास है, तो इसका जोखिम बढ़ सकता है।

कुछ स्वास्थ्य संबंधी कारक

कुछ स्थितियां BPH के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ी पाई गई हैं, जैसे:

  • मोटापा
  • टाइप-2 मधुमेह
  • हृदय संबंधी रोग
  • लंबे समय से रहने वाली गुर्दे की बीमारी
  • शारीरिक गतिविधि की कमी

इन स्थितियों को BPH का सीधा कारण नहीं माना जा सकता, लेकिन इनके साथ इसका संबंध देखा गया है।

क्या खान-पान से प्रोस्टेट बढ़ता है?

किसी एक खाद्य पदार्थ को BPH का सीधा कारण बताने के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं। हालांकि, चाय-कॉफी में मौजूद कैफीन और शराब कुछ लोगों में बार-बार पेशाब आने या रात में पेशाब की समस्या बढ़ा सकते हैं।

बढ़े हुए प्रोस्टेट के लक्षण क्या हैं?

Quick Answer

बढ़े हुए प्रोस्टेट के सामान्य लक्षणों में पेशाब शुरू करने में परेशानी, पेशाब की कमजोर या रुक-रुककर आने वाली धार, बार-बार पेशाब आना, रात में कई बार उठना और मूत्राशय पूरी तरह खाली न होने का एहसास शामिल हैं।

पेशाब से जुड़े सामान्य लक्षण

  • पेशाब शुरू करने में देर लगना
  • पेशाब की धार कमजोर होना
  • पेशाब रुक-रुककर आना
  • पेशाब करते समय जोर लगाना
  • पेशाब के बाद बूंद-बूंद आना
  • मूत्राशय पूरी तरह खाली न होने का एहसास
  • बार-बार पेशाब आना
  • अचानक तेज पेशाब लगना
  • रात में कई बार पेशाब के लिए उठना
  • थोड़ी मात्रा में बार-बार पेशाब आना

इन लक्षणों का कारण केवल BPH नहीं होता। मूत्र संक्रमण, प्रोस्टेट में सूजन और मूत्राशय से जुड़ी कुछ अन्य समस्याओं में भी ऐसे लक्षण हो सकते हैं। इसलिए लगातार परेशानी होने पर जांच जरूरी है।

बढ़े हुए प्रोस्टेट की जांच कैसे होती है?

BPH की पहचान केवल लक्षणों के आधार पर नहीं की जाती। डॉक्टर लक्षणों, स्वास्थ्य इतिहास और जरूरत के अनुसार कुछ जांचों से कारण समझते हैं।

जांच में शामिल हो सकते हैं:

  • स्वास्थ्य इतिहास: लक्षण कब शुरू हुए और कितनी बार होते हैं
  • शारीरिक जांच: जरूरत के अनुसार प्रोस्टेट की जांच
  • मूत्र जांच: संक्रमण या अन्य मूत्र संबंधी समस्या देखने के लिए
  • PSA रक्त जांच: जरूरत के अनुसार
  • अल्ट्रासाउंड: प्रोस्टेट और मूत्र तंत्र की स्थिति देखने के लिए
  • मूत्र प्रवाह और मूत्राशय की जांच: कुछ मामलों में

PSA का बढ़ा हुआ स्तर केवल प्रोस्टेट कैंसर का संकेत नहीं होता। BPH और प्रोस्टेट में सूजन जैसी स्थितियों में भी PSA बढ़ सकता है। इसलिए इसकी जांच का परिणाम अन्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के साथ समझा जाता है (2)।

बढ़े हुए प्रोस्टेट के लिए आयुर्वेदिक दृष्टिकोण क्या है?

Quick Answer

आयुर्वेद में मूत्र संबंधी स्वास्थ्य के लिए कई जड़ी-बूटियों का पारंपरिक उपयोग मिलता है। गोखरू, पुनर्नवा और वरुण जैसी जड़ी-बूटियां मूत्र स्वास्थ्य से जुड़े आयुर्वेदिक उपयोगों के लिए जानी जाती हैं। कुछ जड़ी-बूटियों पर BPH से संबंधित आधुनिक शोध भी हुआ है, लेकिन इन्हें बढ़े हुए प्रोस्टेट का सिद्ध इलाज नहीं माना जा सकता।

गोखरू (Gokshura)

गोखरू (Tribulus terrestris) का आयुर्वेद में मूत्र और पुरुष स्वास्थ्य से जुड़े पारंपरिक उपयोगों के लिए जाना जाता है। इसका उपयोग मूत्र संबंधी स्वास्थ्य को सहारा देने वाली कुछ आयुर्वेदिक औषधियों में किया जाता है।

BPH के संदर्भ में गोखरू को दूसरी जड़ी-बूटियों के साथ मिलाकर भी अध्ययन किया गया है। एक छोटे clinical trial में गोखरू और Murraya koenigii से बनी औषधि की तुलना tamsulosin से की गई थी और पेशाब संबंधी लक्षणों में सुधार देखा गया (3)। हालांकि, यह परिणाम पूरी औषधि से संबंधित था, इसलिए इसे केवल गोखरू के प्रभाव का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

पुनर्नवा (Punarnava)

पुनर्नवा (Boerhaavia diffusa) को आयुर्वेद में मूत्र संबंधी स्वास्थ्य और शरीर में द्रव संतुलन से जुड़े पारंपरिक उपयोगों के लिए जाना जाता है। इसका उपयोग कई आयुर्वेदिक योगों में किया जाता है।

BPH के लिए पुनर्नवा के प्रभाव को साबित करने वाले पर्याप्त उच्च गुणवत्ता वाले मानव अध्ययनों की कमी है। इसलिए इसे पारंपरिक उपयोग के आधार पर समझना चाहिए, न कि BPH के सिद्ध इलाज के रूप में।

वरुण (Varuna)

वरुण (Crataeva nurvala) आयुर्वेद में मूत्र संबंधी स्वास्थ्य के लिए उपयोग की जाने वाली पारंपरिक जड़ी-बूटियों में शामिल है। इसे विशेष रूप से मूत्र तंत्र से जुड़े कुछ आयुर्वेदिक योगों में शामिल किया जाता है।

वरुण पर मूत्र संबंधी लक्षणों को लेकर कुछ शोध हुए हैं, लेकिन उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर इसे BPH का सिद्ध इलाज नहीं कहा जा सकता।

हल्दी और Curcumin

हल्दी (Curcuma longa) का आयुर्वेद में लंबे समय से पारंपरिक उपयोग होता रहा है। इसे मुख्य रूप से सूजन और सामान्य स्वास्थ्य से जुड़े उद्देश्यों के लिए जाना जाता है। हल्दी में पाया जाने वाला प्रमुख सक्रिय घटक करक्यूमिन है।

BPH में करक्यूमिन पर भी आधुनिक शोध हुआ है। 2026 की एक व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण में 6 अध्ययनों और 697 लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें पेशाब से जुड़े कुछ मापों में सुधार की संभावना दिखाई दी, लेकिन अध्ययनों के परिणामों में अंतर था और बेहतर शोध की जरूरत बताई गई (4)।

इसलिए करक्यूमिन को BPH में शोध के योग्य घटक माना जा सकता है, लेकिन इसे सिद्ध इलाज या चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

बढ़े हुए प्रोस्टेट में डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

बढ़े हुए प्रोस्टेट में डॉक्टर से कब मिलना चाहिए

अगर पेशाब संबंधी परेशानी लगातार बनी रहती है या आपकी रोजमर्रा की जिंदगी और नींद को प्रभावित करती है, तो डॉक्टर या मूत्र रोग विशेषज्ञ से सलाह लें।

तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें अगर:

  • पेशाब बिल्कुल न आ रहा हो
  • पेशाब में खून दिखाई दे
  • पेशाब की परेशानी के साथ बुखार या ठंड लग रही हो
  • पेट के निचले हिस्से या मूत्र मार्ग में तेज दर्द हो

ऐसे लक्षणों को केवल बढ़े हुए प्रोस्टेट का असर मानकर घर पर इलाज करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

Frequently Asked Questions

1. बढ़े हुए प्रोस्टेट की दवा कौन सी है?

बढ़े हुए प्रोस्टेट की दवा व्यक्ति के लक्षण, प्रोस्टेट के आकार और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए बिना जांच के कोई दवा शुरू करना उचित नहीं है।

2. प्रोस्टेट के लिए आयुर्वेदिक दवा क्या है?

आयुर्वेद में गोखरू, पुनर्नवा और वरुण जैसी जड़ी-बूटियों का मूत्र स्वास्थ्य के लिए पारंपरिक उपयोग मिलता है। हालांकि, किसी एक आयुर्वेदिक दवा को BPH का सिद्ध इलाज नहीं माना जा सकता।

3. क्या बढ़े हुए प्रोस्टेट की सबसे अच्छी दवा होती है?

नहीं। सभी लोगों के लिए एक ही दवा सबसे अच्छी नहीं होती। उपचार का चुनाव लक्षणों, प्रोस्टेट के आकार और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार किया जाता है।

4. क्या प्रोस्टेट को सिकोड़ने की दवा होती है?

कुछ चिकित्सकीय दवाएं कुछ पुरुषों में बढ़े हुए प्रोस्टेट का आकार कम कर सकती हैं। कौन सी दवा उपयुक्त है, यह डॉक्टर जांच के बाद तय करते हैं।

5. प्रोस्टेट का आयुर्वेदिक इलाज या उपचार क्या है?

आयुर्वेद में प्रोस्टेट और मूत्र स्वास्थ्य के लिए कुछ जड़ी-बूटियों और औषधीय योगों का पारंपरिक उपयोग मिलता है। इन्हें योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से लेना बेहतर है।

6. क्या BPH की दवा जरूरी होती है?

हर व्यक्ति में दवा की जरूरत नहीं होती। हल्के लक्षणों में डॉक्टर निगरानी और जीवनशैली में बदलाव की सलाह दे सकते हैं, जबकि अधिक परेशानी होने पर दवा या अन्य उपचार की आवश्यकता हो सकती है।

मुख्य बातें

बढ़ा हुआ प्रोस्टेट (BPH) उम्र बढ़ने के साथ अधिक सामान्य होने वाली गैर-कैंसरकारी स्थिति है। इसके कारण पेशाब शुरू करने में परेशानी, कमजोर धार, बार-बार पेशाब आना और रात में कई बार उठना जैसे लक्षण हो सकते हैं।

आयुर्वेद में गोखरू, पुनर्नवा और वरुण जैसी जड़ी-बूटियों का मूत्र स्वास्थ्य के लिए पारंपरिक उपयोग मिलता है। करक्यूमिन पर BPH से संबंधित आधुनिक शोध भी उपलब्ध है। हालांकि, इन जड़ी-बूटियों को बढ़े हुए प्रोस्टेट का सिद्ध इलाज नहीं माना जाना चाहिए। लगातार या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर से जांच और उचित सलाह लेना जरूरी है।

References

# Reference
1. NIDDK. Enlarged prostate (benign prostatic hyperplasia) [Internet]. National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases. NIDDK - National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases; 2024 [cited 2026 Aug 26]. Available from: https://www.niddk.nih.gov/health-information/urologic-diseases/prostate-problems/enlarged-prostate-benign-prostatic-hyperplasia
2. Carter HB. Prostate cancers in men with low PSA levels — Must we find them? New England Journal of Medicine. 2004 May 27;350(22):2292–4.
3. Sengupta G, Hazra A, Kundu A, Ghosh A. Comparison of murraya koenigii- and tribulus terrestris-based oral formulation versus tamsulosin in the treatment of benign prostatic hyperplasia in men aged >50 years: A double-blind, double-dummy, randomized controlled trial. Clinical therapeutics [Internet]. 2011 Dec [cited 2026 Aug 26];33(12):1943–52. Available from: https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/22177370/
4. Santana DS, Porto BC, Cardoso RB, Lopes GMM, Gimenez LGS, Passerotti CC, et al. Curcumin versus placebo in benign prostatic hyperplasia: A systematic review and meta-analysis. European Journal of Clinical Pharmacology. 2026 June 5;82(7).